Excellent Shiksha class - 12th,Class 12th Chemistry,पृष्ट रसायन Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02

Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02


Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02

Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02 पृष्ट रसायन का ही एक अहम् भाग है | अगर आप इस इकाई अथवा पाठ को अच्छे से अध्ययन करना चाहते है तो हम आपसे यही अनुरोध करते है कि आप इस बहुत बड़ी इकाई को छोटे छोटे part में पढ़े | यही वजह है कि हम आपको यहाँ पर part वाइज नोट्स Provide कर रहे है | इस part में जो भी महत्वपूर्ण हैडिंग है उन्हें जरूर याद करे | क्यूंकि ये ही आपको अच्छे मार्क्स प्राप्त करने में मदद करेंगी |

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What We Learn In This Part

इस भाग में हम बोर्ड में पूछे गये कम से कम 3 से 5 मार्क्स का अध्ययन करेंगे | अत: आप इन्हें ध्यान से पढ़े | अगर आप कुछ समस्या महसूस करते है तो आप हमे सम्पर्क कर सकते हो और आप Ask Question पर क्लिक करके प्रश्न भी पूछ सतके हो | हम आपसे ये गुजारिश करते है कि आप इन महत्वपूर्ण हैडिंग को अवस्य याद करेंगे  | क्यूंकि ये वो सभी हैडिंग है जो पिछले बहुत सालो के पेपर में रिपीट हुई है | अगर आप इन्हें याद करके एग्जाम में बैठते है तो आप 90 % से अधिक अंक हासिल कर सकते है |

Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02 में महत्वपूर्ण  Headings निम्नलिखित है | इन्हें अच्छे से याद करे | ये आपको अच्छे अंक दिलाने में मदद करेगी: 

  1. ठोसो पर गैसो के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक
  2. अधिशोषण समतापी और फ्रेंडलिक अधिशोषण समतापी
  3. विलयन प्रवस्था में अधिशोषण और अधिशोषण समदाबी
  4. उत्प्रेरण और इसके प्रकार
  5. भोतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरण का वर्गीकरण: समांगी उत्प्रेरण व विषमांगी उत्प्रेरण
  6. कार्य विधि के आधार पर उत्प्रेरक का वर्गीकरण: धनात्मक उत्प्रेरण व ऋणात्मक उत्प्रेरण
  7. स्वं उत्प्रेरण और प्रेरित उत्प्रेरण
Class 12th Chemistry Chapter-05 पृष्ट रसायन part -02

क्या जरूर्री है क्या नही  :-अच्छे से अच्छे अंक लाने के  लिए आपको बेहतर नोट्स एंड बेहतर क्लास लेनी चाहिये जो आपको बिलकुल फ्री में हम यहाँ पर दे रहे है |

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ठोसो पर गैसो के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक

ठोसो पर गैसो के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक: इन्हे निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं :-

1-गैसों की प्रकृति : कुछ गैसे जैसे कार्बन डाइऑक्साइड , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल , अमोनिया और क्लोराइड आदि सरलता से द्रवित होने के कारण अधिक अधिशोषित होती हैं | जबकि हाइड्रोजन,  नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का अधिशोषण कम होता है|

2-ताप का प्रभाव: जैसे जैसे ताप को बढ़ाया जाता है, वैसे ही गैसों के अधिशोषण की क्षमता घटती जाती है |

3- पृष्ठ क्षेत्रफल: जितना पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होता है, उतना ही अधिशोषण अधिक होता है | अत: हम कह सकत है कि ये दोनों एक दूसरे के अनुक्र्मानुपति होते है|

4- दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने से अधिशोषण की मात्रा में वृद्धि होती है, क्योंकि दाब के कारण पदार्थ के अणुओ में सकुंचन होता है | जिससे वो पास-पास में आते है |

अधिशोषण समतापी और फ्रेंडलिक अधिशोषण समतापी

अधिशोषण समतापी: एक निश्चित ताप पर अधिशोषित गैस की मात्रा तथा साम्यावस्था पर दाब के मध्य परस्पर सम्बन्ध को अधिशोषण समतापी  कहते है | इसे गणितीय वयंजक द्वारा दो प्रकार से दर्शाया जा सकता है :-

1- फ्रेंडलिक अधिशोषण समतापी : किसी निश्चित ताप पर दाब के साथ अधिशोषण द्वारा किसी अधिशोषित होने वाली गैस की मात्रा के लिए फ्रेंडलिक ने एक मुलानुपाती समीकरण प्रस्तुत की थी जिसे फ्रेंडलिक अधिशोषण समतापी समीकरण  कहा गया जो निम्न प्रकार थी :-

फ्रेंडलिक अधिशोषण समतापी

फ्रेंडलिक अधिशोषण की सीमाएं :इसकी निम्नलिखित सीमाएं है –
1- यह दाब के निश्चित परिसर में ही कार्य करता है |अधिक दब के लिए यह सही नहीं है |
2- इसमें प्रयुक्त नियतांक अधिशोष्य के साथ परिवर्तित होते है |
3- इसका कोई भी गणितीय आधार व्यक्त नहीं किया गया है |

2- लैंगम्यूरअधिशोषण समतापी: यह हमारे पाठ्यक्रम में नहीं है | इसे आने वाली कक्षाओ में पढ़ेंगे |

विलयन प्रवस्था में अधिशोषण और अधिशोषण समदाबी

विलयन प्रवस्था में अधिशोषण : ठोस पदार्थ विलयनो में घुले हुए पदार्थो का भी अधिशोषण करते है | जैसे एसिटिक अम्ल के विलयन में चारकोल डाल कर हिलाया जाता है तो उसके संद्रता में कमी आ जाती है |

अधिशोषण समदाबी : निश्चित दाब पर अधिशोषण की मात्रा तथा साम्यावस्था पर ताप के मध्य आरेख को अधिशोषण समदाबी कहते है|

अधिशोषण के अनुप्रयोग: अधिशोषण के निम्नलिखित प्रयोग है :-
1- गैस मास्क के निर्माण में |
2- कपड़े को रंगने के लिए |
3- आर्द्रता पर नियंत्रण करने के लिए |
4 – विलयन से रंगीन पदार्थ को हटाने में , आदि |

उत्प्रेरण और इसके प्रकार

उत्प्रेरण : सर्वप्रथम ब्रिजिलियस वैज्ञानिक ने पाया की बहुत सी अभिक्रिया का वेग किसी बाहरी पदार्थ की केवल उपस्थिति के कारण बढ़ जाता है, परन्तु अभिक्रिया के उपरांत बहरी पदार्थ में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नही होता है | इस बाहरी पदार्थ को उत्प्रेरक और इस प्रक्रिया को उत्प्रेरण कहते है |

जैसे :- पोटेसियम क्लोरेट को 360 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करने पर इतनी ऑक्सीजन नही बनती है| जितनी MnO2 की उपस्थिति में गर्म करने से बनती है |

उत्प्रेरण का वर्गीकरण : इसे दो प्रकार से वर्गीक्रत किया जा सकता है :-

1:- भोतिक अवस्था के आधार पर              2:- कार्यविधि के आधार पर

भोतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरण का वर्गीकरण: समांगी उत्प्रेरण व विषमांगी उत्प्रेरण

भोतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरण का वर्गीकरण : इस आधार पर इसे दो भागो में बांटा गया है –

1:- समांगी उत्प्रेरण            2:- विषमांगी उत्प्रेरण

समांगी उत्प्रेरण : जब किसी अभिक्रिया में उत्प्रेरक तथा अभिकारक एक ही प्रवस्था में रहते है और समांगी मिश्रण बनाते है, तो इस उत्प्रेरण को समांगी उत्प्रेरण कहते है |और उत्प्रेरक समांगी उत्प्रेरक  कहलाता है |

जैसे :-
C12H22O11 (aq) + H2O (l) —–तनु H2SO4 (उत्प्रेरक )——-> C6H12O6 (aq) + C6H12O6 (aq)

विषमांगी उत्प्रेरण : जब किसी अभिक्रिया में अभिकारक तथा उत्प्रेरक की प्रवस्था अलग अलग हो अर्थात वे विषमांगी मिश्रण बनाते है, तो इस उत्प्रेरण को विषमांगी उत्प्रेरण कहते है तथा उत्प्रेरक को विषमांगी उत्प्रेरक कहते है|

जैसे :- N2 (g ) + 3H2 (g) —————Fe (s) उत्प्रेरक —————-> 2NH3 (g)

कार्य विधि के आधार पर उत्प्रेरक का वर्गीकरण: धनात्मक उत्प्रेरण व ऋणात्मक उत्प्रेरण

कार्य विधि के आधार पर उत्प्रेरक का वर्गीकरण :इस आधार पर इसे चार भागो में बांटा गया है –
a :- धनात्मक उत्प्रेरण      b:- ऋणात्मक उत्प्रेरण     c:- स्वं उत्प्रेरण         d:- प्रेरित उत्प्रेरण

धनात्मक उत्प्रेरण : जब कोई उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति को बढ़ा देता है तो उसको धनात्मक उत्प्रेरक कहते है और यह प्रक्रिया धनात्मक उत्प्रेरण कहलाती है |

जैसे :- 2H2 (g) + O2 (g) ——–Pt (s) उत्प्रेरक ——> 2H2O (l )

ऋणात्मक उत्प्रेरण : जब कोई उत्प्रेरक अभिक्रिया के वेग को घटा देता है तो उसको ऋणात्मक उत्प्रेरक  कहते है और यह प्रक्रिया ऋणात्मक उत्प्रेरण  कहलाती है |

जैसे :- 2H2O2 (l) ————H3PO3 ऋणात्मक उत्प्रेरक ———-> 2H2O(l) + O2

स्वं उत्प्रेरण और प्रेरित उत्प्रेरण

स्वं उत्प्रेरण : कुछ अभिक्रियो में रासायनिक अभिक्रिया की प्रगति के फलस्वरूप बना उत्पाद ही स्वं उत्प्रेरक का कार्य करके अभिक्रिया का वेग बढ़ा देता है |एसे पदार्थ को स्वं उत्प्रेरक कहते है और यह प्रक्रिया स्वं उत्प्रेरण  कहलाती है |

जैसे :- एथिल एस्टेट के जल अपघटन में उत्पन्न एसिटिक अम्ल स्वं उत्प्रेरक का कार्य करता है: –
CH3COOC2H5 + H2O ————–> CH3COOH + C2H5OH

प्रेरित उत्प्रेरण: यदि कोई दो अभिक्रिया एक साथ चल रही है तो कुछ परिस्थिथियो में कोई एक अभिक्रिया दूसरी अभिक्रिया को उत्प्रेरित कर गति को बढ़ा देती है इस प्रकार की घटनाओं को प्रेरित उत्प्रेरण  कहते है|

जैसे :- Na2SO4 वायु में ऑक्सीकरण हो जाता है , परन्तु Na2SO3 का वायु में ऑक्सीकरण नही होता है | यदि दोनों का विलयन बना कर ऑक्सीकरण किया जाता है , तो दोनों का ऑक्सीकरण हो जाता है|

the end

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