Excellent Shiksha class - 12th,विद्युत् आवेश एवं विधुत क्षेत्र Class 12th Physics Chapter-01 (विधुत आवेश एवम विधुत क्षेत्र) part -01

Class 12th Physics Chapter-01 (विधुत आवेश एवम विधुत क्षेत्र) part -01


Class 12th Physics Chapter-01 (विधुत आवेश एवम विधुत क्षेत्र) part -01

Class 12th Physics Chapter-01 (विधुत आवेश एवम विधुत क्षेत्र) part -01 में हम निम्न महत्वपूर्ण हैडिंग का अध्ययन करेंगे:- 

स्थिर विधुत विज्ञान की परिभाषा
विधुत आवेश एवं विद्युत आवेश के प्रकार
आवेश का संरक्षणऔर आवेश का कवांटीकरण 
चालन विधि ,प्रेरण विधि और घर्षण विधि
कूलाम का नियम और उत्पत्ति
आपेक्षिक विद्युतशीलता की परिभाषा
कूलाम के नियम का सदिश रूप
बल के लिए अध्यारोपण का सिद्धांत
सतत आवेश वितरण, रेखिक आवेश वितरण
रेखीय आवेश घनत्व, पृष्ठ पर आवेश वितरण
पृष्ठ पर आवेश घनत्व, आयतन  पर आवेश वितरण, आवेश घनत्व
विद्युत क्षेत्र एवं विद्युत बल रेखाए
विद्युत बल रेखाओं के गुण
दो विद्युत बल रेखाएं कभी भी एक दूसरे को नहीं कटती क्यों ?
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक , आदि |

हम आपसे ये गुजारिश करते है कि आप इन महत्व पूर्ण हैडिंग को अवस्य याद करे | क्यूंकि ये वो सभी हैडिंग है जो पिछले बहुत सालो के पेपर में रिपीट हुई है | 

अगर आप इन्हें याद करके एग्जाम में बैठते है तो आप 90 % से अधिक अंक हासिल कर सकते है | 

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# 1 :- स्थिर विधुत विज्ञान:-
                                          भोतिक विज्ञान की वह शाखा  जिसके अंतर्गत उन वस्तुओ का अध्ययन किया जाता है , जिन पर आवेश स्थिर रहता है, स्थिर विधुत विज्ञान कहलाती है |

#2 :- विधुत आवेश :-
                                    द्रव्य का वह गुण , जिसके कारण वह आकर्षण व प्रतिकर्षण का गुण उत्पन करता है विधुत आवेश कहलाता है |

 #3:- विद्युत आवेश के प्रकार   :-विद्युत आवेश दो प्रकार का होता है | एक धन आवेश दूसरा ऋण आवेश , इसकी खोज सर्वप्रथम बेंजामिन फ्रैंकलिन ने की थी |

#4:- विद्युत आवेश के गुण:- विद्युत आवेश में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं:- 

1):- आकर्षण एवं प्रतिकर्षण:- सजातीय आवेश एक दूसरे को  प्रतिकर्षित करते हैं। जबकि विजातीय  आवेश एक दूसरे को आकर्षित करते हैं |

2):- आवेश का संरक्षण:- इस नियम अनुसार आवेश को ने तो उत्पन्न किया जा सकता हैं और  न ही नष्ट किया जा सकता है, परन्तु  एक वस्तु से दूसरी वस्तु पर स्थानांतरित किया जा सकता है |

3):- वेग का प्रभाव :-विद्युत आवेश पर  वेग  का किसी भी प्रकार से प्रभाव नहीं पड़ता है |

4):- आवेश की  योज्यता:- किसी निकाय का कुल विद्युत आवेश उसके विभिन्न अवयवयी कणों पर उपस्थित  भिन्न-भिन्न आवेशों के बीजगणितीय योग के बराबर  होता है |

5):- आवेश का कवांटीकरण  :- प्रकृति में आवेश सदैव एक निश्चित न्यूनतम मान के पूर्ण गुणज के रूप में उत्पन्न होता है, इसे आवेश का कवांटीकरण कहते हैं,

और इस न्यूनतम आवेश को मूल आवेश कहते हैं इसे e प्रदर्शित करते हैं , अर्थात q = ne जहां q आवेश n प्राकृतिक संख्या और e मूल आवेश है e  का मान 1.6×1019  होता है|

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#5:- आवेशन की विधियां:- किसी चालक के आवेदन की निम्नलिखित तीन  विधियां होती हैं 

1):- चालन विधि:- इस विधि में आवेशित वस्तु को अन आवेशित वस्तु के संपर्क में लाकर अन आवेशित वस्तु को आवेशित किया जाता है | इसलिए इसमें दोनों वस्तुओं पर समान प्रकृति का आवेश आता है | 

2):- प्रेरण विधि :-इस विधि में आवेशित वस्तु को अन आवेशित वस्तु के पास में रखकर , अन आवेशित वस्तु को पृथ्वी के संपर्क में लाया जाता  हैं | जिसके फलस्वरूप अन आवेशित वस्तु विपरीत प्रकृति के आवेश से आवेशित हो जाती है |

 3:-  घर्षण विधि :-इस विधि में किन्हीं दो वस्तुओं को परस्पर घर्षित किया जाता है जिसके फलस्वरूप यह दोनों विपरीत आवेश से आवेशित हो जाती हैं ।

#6:- कूलाम का नियम :-इस नियम के अनुसार दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच सदैव एक वैद्युत बल कार्य करता हैं |  जो उन दोनों आवेशों के परिमाणो के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती और उन दोनों आवेशों के बीच  की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं अर्थात   

kulamb ka niyam in hindi

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#7:-आपेक्षिक विद्युतशीलता:- किसी माध्यम की विद्युतशीलता तथा निर्वात की विद्युतशीलता का अनुपात आपेक्षिक विद्युतशीलता कहलाता है |  इसे एप्स लाइन आर(εr) से प्रदर्शित करते हैं |  अर्थात
                                                      εr = ε/ε0

#8:-कूलाम के नियम का सदिश रूप:- मानचित्र अनुसार दो बिंदु आवेश q1 व q2 है जो मूल

बिंदु से क्रमानुसार r1 व r2 स्थिति पर है, 

   कूलाम के नियम का सदिश रूप 

 क्योंकिq2 के सापेक्ष सदिश r21 है तो, 
                          r21 = r2-r1

 कूलाम के नियम अनुसार q2 पर आवेश q1 के कारण बल 
                  F21=k(q1q2/r21^2)r21^

इसी प्रकार आवेश q1 पर आवेश q2 के कारण बल
                F12=k(q1q2/r12^2)r12^
इससे स्पष्ट है कि 
                   F12 =-F12  
अर्थात दोनों आवेशों पर लगने वाला बल परस्पर समान परंतु विपरीत दिशा में होता है| अर्थात कूलाम बल न्यूटन के तृतीय नियम का पूर्ण रूप से पालन करता है|

#9:-बल के लिए अध्यारोपण का सिद्धांत:- किसी एक स्थिर आवेश पर निकाय के अन्य स्थिर आवेशों के कारण लगने वाला परिणामी बल , उस पर निकाय के प्रत्येक आवेश के कारण लगने वाले अलग-अलग बलों के सदिश योग के बराबर होता है इसे बल के लिए अध्यारोपण का सिद्धांत कहते हैं |

#10:-सतत आवेश वितरण:- विविक्त आवेशों को एक समान रूप से वितरित करने की प्रक्रिया सतत आवेश वितरण कहलाती है | यह सामान्य तीन प्रकार की होती है | 

1)- रेखिक आवेश वितरण 2)- पृष्ठ पर आवेश वितरण 3)  आयतन वितरण पर आवेश वितरण |

1)- रेखिक आवेश वितरण:-जब आवेश एक समान रूप सेकिसी  रेखा पर वितरित किया जाता है तो आवेश का वितरण रेखीय आवेश वितरण कहलाते हैं|  

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रेखीय आवेश घनत्व:- 1 मीटर लंबाई पर उपस्थिकिसीत आवेश की मात्रा को रेखीय आवेश घनत्व कहते हैं | 
 इसे  λ से प्रदर्शित करते हैं अर्थात 
  λ =dq/dl 
     मात्रक=  कूलाम प्रति मीटर 
 
2)-पृष्ठ पर आवेश वितरण:- जब आवेश किसी पृष्ठ पर एक समान रूप से वितरित किए जाते हैं तो आवेश का वितरण पृष्ठ पर आवेश वितरण कहलाते हैं| 
 
पृष्ठ पर आवेश घनत्व:-1 मीटर वर्ग क्षेत्रपाल पर उपस्थित आवेश की मात्रा पृष्ठ पर आवेश घनत्व कहलाती है 1 इसे σ से प्रदर्शित करते हैं | अर्थात 
σ =dq/dA
 मात्रक- कूलाम प्रति मीटर वर्ग
 
3)  आयतन  पर आवेश वितरण:- जब एक समान रूप से आयतन में आवेश का वितरण किया जाता है तो यह वितरण आयतन पर आवेश वितरण कहलाते है|
आवेश घनत्व:- 1 मीटर घन में उपस्थित आवेश की मात्रा आयतन पर आवेश घनत्व कहलाती है1 इसे ρ से प्रदर्शित करते हैं | अर्थात
 ρ =dq/dv 
मात्रक- कूलाम प्रति मीटर घन
 
#11:-विद्युत क्षेत्र:आवेश के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें कोई अन्य आवेश आकर्षण व प्रतिकर्षण बल का अनुभव करता है विद्युत क्षेत्र कहलाता है | 
 
#12:-विद्युत बल रेखाएं:- विद्युत क्षेत्र में खींची गई वे निष्कोंन वर्क रेखाएं जिन पर खींची गई स्पर्श रेखाए जो  विद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती हैं , विद्युत बल रेखाएं कहलाती है|
 
#13:-विद्युत बल रेखाओं के गुण:- इनमें निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं- 
1)- यह धनात्मक आवेश से चल कर ऋण आवेश पर खत्म हो जाती हैं | 
2)- यह खुला वक्र बनती है | 
3)- दो विद्युत बल रेखाएं कभी भी एक दूसरे को नहीं कटती क्योंकि यदि ऐसा होता हैं तो कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकती हैं,  जो दो अलग-अलग विद्युत क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करेंगी जो की असंभव है| 
4)- यदि किसी विद्युत बल रेखा पर स्पर्श रेखा खींची जाती है तो स्पर्श रेखा विद्युत क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती हैं | 
5)-सघन विद्युत क्षेत्र में विद्युत बल रेखाएं पास पास होती हैं जबकि विरल विद्युत क्षेत्र में विद्युत बल रेखाएं दूर दूर होती हैं |
6)-चालक में विद्युत बल रेखाएं नहीं पाई जाती|
#14:-विद्युत बल रेखाएं खींचना:-
विद्युत् बल रेखाए खींचना

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#15:- विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:-विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु पर परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल को उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहते हैं| इसे E से प्रदर्शित करते हैं अर्थात 
    E = F/q 
मात्रक- न्यूटन प्रति कुलाम अथवा वोल्ट प्रति मीटर 
राशि- सदिश राशि है 
दिशा – धनावेश से ऋण आवेश की ओर
 
#16:-बिंदु आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता के लिए व्यंजक:– माना एक बिंदु आवेश q है जो मूल बिंदु पर स्थित है इस बिंदु से r दूरी पर स्थित बिंदु p पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी है –
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बिंदु  आवेश q के कारन  बिंदु p पर उपस्थित परिक्षण आवेश पर विद्युत बल  Class 12th Physics Chapter-01 (विधुत आवेश एवम विधुत क्षेत्र) part -01
अत: बिदु p पर विद्युत क्षेत्र  की तीर्वता 
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the end

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